Mirza Ghalib Shayari-मिर्ज़ा ग़ालिब की शेरो-शायरी


Mirza Ghalib Shayari-मिर्ज़ा ग़ालिब की शेरो-शायरी


Mirza Ghalib Shayari-मिर्ज़ा ग़ालिब की शेरो-शायरी
Mirza Ghalib/Miya Galib




इश्क़ ग़ालिबनिकम्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे काम के!

हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है,
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता

इस सादगी पे कौन ना मर जाए, खुदा,
लड़ते है और हाथ मे तलवार भी नहीं!

दिल--नादान तुझे हुआ क्या है,
आखिर इस दर्द की दवा क्या है?

आता है दाग--हसरत--दिल का शुमार याद,
मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ख़ुदा ना मांग!!

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़़वाहिश पर दम निकलेबहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
यही है आज़माना तो सताना किसको कहते हैं,
अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तहां क्यों हो

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है
ये वो आतिश ग़ालिब
ली लगाए लगे
और बुझाए बने.

हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन,
 दिल के खुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
उनको देखे से जो जाती है मुँह पर रौनक,
वो समझते हैं के बीमार का हाल अच्छा है

इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब',
कि लगाये लगे और बुझाये बुझे

Ham ko maalūm hai jannat kī haqīqat lekin
 Dil ko Khush Rakhne ko 'ġhālib' ye ḳhayāl achchhā hai

था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ होता तो ख़ुदा होता,
डुबोया मुझको होने ने मैं होता तो क्या होता !
हुआ जब गम से यूँ बेहिश तो गम क्या सर के कटने का,
ना होता गर जुदा तन से तो जहानु पर धरा होता!

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या हैतुम्हीं कहो कि ये अंदाज़--गुफ़्तगू क्या है
शोले में ये करिश्मा बर्क़ में ये अदाकोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या है

हुई मदद की ग़ालिबमर गया पर याद आता हैवो हर एक बात पर कहना की यु होता तो क्या होया

दिल से तेरी निगाह,
जिगर तक उतर गई
दोनों को एक Ada में
रजामंद कर गई!

हमको मालूम हैजन्नत की हकीकत लेकिन,
दिल को खुश रखने को ग़ालिब
ये खयाल अच्छा है

दर्द जब दिल मैं हो तोह दवा कीजिये,
दिल ही जब दर्द हो तोह क्या कीजिये?

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