Friday, August 2, 2019

Prerak Kahaniya दुष्टता का फल


प्रेरक कहानियां (prerak kahaniya )  दुष्टता का फल


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नमस्कार दोस्तों मैं हूं आपका दोस्तसूरज शुक्ला और आपकी इस पोस्ट में मैं आपके लिए लेकर कुछ प्रेरक कहानियां prerak kahaniya लेकर आया हूं. आज की हमारी prerak kahaniya का शीर्षक है दुष्टता का फल तोचलिए कहानी शुरू करते हैं.

कंचनपुर के एक धनी व्यापारी के घर में रसोई में एक कबूतर ने घोंसला बना रखा था.  किसी दिन एक लालची कौवा जो वहां उधर आ निकला.  वहां मछली को देख कर उसके मुंह में पानी आ गया.  तब उसके मन में विचार आया कि मुझे इस रसोई घर में घुस ना चाहिए लेकिन कैसे घुसा यह सोचकर वह परेशान था तभी उसकी नजर वह कबूतरों के गोस्लो पर पड़ी.

उसने सोचा कि मैं अगर कबूतर से दोस्ती कर लूं तो शायद मेरी बात बन जाए.  कबूतर जब दाना चुगने के लिए बाहर निकलता है तो कौवा उसके साथ साथ निकलता है. थोड़ी देर बाद कबूतर ने पीछे मुड़कर देखा तो कौवा उसके पीछे हैं इस पर कबूतर ने कौवे से कहा भाई तुम मेरे पीछे क्यों हो इस पर कबूतर से कहा कि तुम मुझे अच्छे लगते हो इसलिए मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूं.  इस पर कौवे से कबूतर ने कहा कि हम कैसे दोस्त बन सकते हैं हमारा और तुम्हारा भोजन भी तो अलग है मैं बीच खाता हूं और तुम कीड़े.  इस पर कवि ने चापलूसी दिखाते हुए कहा कौन सी बड़ी बात है मेरे पास घर नहीं है इसीलिए हम साथ साथ तो रह सकते हैं ना और साथ ही भोजन खोजने आया करेंगे तुम अपना अपना खाना मैं अपना खाऊंगा.


इस पर घर के मालिक ने देखा कि कबूतर के साथ एक कौवा भी है तो उसने सोचा कि चलो कबूतर का मित्र होगा इसलिए उसने उस बारे में अधिक नहीं सोचा.  अगले दिन कबूतर खाना खोजने के लिए साथ चलने को कहता है तो कौवे के पेट में दर्द का बहाना बना वहीं रुक जाता है.  इस पर कबूतर अकेले ही चला गया क्या कि कव्वे ने घर के मालिक को यह कहते सुना था नौकर को आज कुछ मेहमान आ रहे हैं इसलिए तुम मछली बना लेना. 

उधर का नौकर के रसोई से बाहर निकलने का इंतजार ही कर रहा था कि उसके जाते ही करेंगी और झपटा और मछली उठा कर आराम से खाने लगा नौकर जब वापस आया तो कौवे को मछली खाता देख गुस्से से भर गया और कांग्रेस को पकड़कर गर्दन मरोड़  दी.


जब सामने कबूतर वापस आया तो उसने कवर की हालत देखी तो सारी बात समझ गयाइसीलिए कहा गया है कि दुष्ट प्रकृति के प्राणी को उसके किए की सजा अवश्य मिलती है.


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