Thursday, August 1, 2019

21 Chanakya Niti Bani in Hindi


Chanakya Niti Bani-चाणक्य नीति -  सफल होने के लिए मालूम होनी चाहिए यह 21 नीतियां


Chanakya Niti Bani/latestphoneprice.com
21 Chanakya Niti Bani in Hindi 

Chanakya Niti Bani - चाणक्य एक बहुत बड़े विद्वान थेचाणक्य एक गंभीर चिंतक के रूप में प्रसिद्ध थे.  चाणक्य के नीतियों के बारे में हम सब बहुत अच्छी तरीके से जानते हैं.  Chanakya Niti Bani लोक सदियों से याद करते चले आ रहे हैं.  इस पोस्ट के अंदर हम आपको चाणक्य की 21 नीतियों के बारे में बताएंगे.  यह नीतियां बहुत प्रसिद्ध है. चलिए शुरू करते हैं.



Chanakya Niti Bani - 21 चाणक्य नीति बानी



  • ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए, दूसरे लोगों को ब्राह्मणों की पूजा करनी चाहिएपत्नी को पति की पूजा करनी चाहिए तथा दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आए उसकी सभी को पूजा करनी चाहिए.

  • अनेक व्यक्ति जो एक ही गर्भ से पैदा हुए हैं या नक्षत्र में पैदा हुए हैं वह एक से नहीं रहते.  उसी प्रकार जैसे के बेर के झाड़ के सभी बेर एक से नहीं रहते.

  • मुड़ लोग बुद्धिमान ओं से ईर्ष्या करते हैं.  गलत मार्ग पर चलने वाली औरत पवित्र स्त्री से ऐसा करती है.  बदसूरत औरत खूबसूरत औरत से ईर्ष्या करती है.

  • खाली बैठने से अभ्यास का नाश होता है.  दूसरों को देखभाल करने के लिए देने से पैसा नष्ट होता है.  गलत ढंग से बुआई करने वाला किसान अपने बीजों का नाश करता है.  यदि सेनापति नहीं है तो सेना का नाश होता है.

  • जो वैदिक ज्ञान की निंदा करते हैंशास्त्र सम्मत जीवन शैली की मजाक उड़ाते हैंशांतिपूर्ण स्वभाव के लोगों की मजाक उड़ाते हैंवह बिना किसी आवश्यकता के दुख को प्राप्त होते हैं.

  • अकेले ही पैदा होता है.  अकेले ही मरता है.  अपने कर्मों के शुभ अशुभ परिणाम अकेले ही भोगता है.  अकेले ही नरक में जाता है.  या सद्गति प्राप्त करता है.

  • वासना के समान दुष्कर कोई रोग नहीं.  मोह के समान कोई शत्रु नहीं.  क्रोध के समान अग्नि नहीं.  स्वरूप के ज्ञान के समान कोई बोधन.

  • दान गरीबी को खत्म करता है.  अच्छा आचरण दुख को मिटाता है.  विवेक अज्ञान को नष्ट करता है.  जानकारी भय को समाप्त करती है.

  • जिसने अपने स्वरूप को जान लिया उसके लिए स्वर्ग तो तिनके के समान है.  एक पराक्रमी योद्धा अपने जीवन को तुच्छ मानता है.  जिसने अपनी कामना को जीत लिया उसके लिए स्त्री भोग का विषय नहीं. उसके लिए संपूर्ण ब्रह्मांड तुच्छ है जिसके मन में कोई आ सकती नहीं.

  • जब आप सफर पर जाते हैं तो विद्यार्जन ही आपका मित्र हैं.  बीमार होने पर दवा मित्र हैं.  अर्जित पुण्य मृत्यु के बाद एकमात्र मित्र. 

  • समुद्र में होने वाली वर्षा  व्यर्थ है.  जिसका पेट भरा हुआ है उसके लिए अन्य व्यर्थ है.  पैसे वाले आदमी के लिए भेटवस्तू का कोई अर्थ नहीं.  दिन के समय जनता दिया व्यर्थ है. 

  • वर्षा के जल के  समान कोई  जल नहीं . खुद की शक्ति के समान कोई शक्ति नहीं.  नेत्र ज्योति के समान कोई प्रकाश ने.  अन्य से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं.

  • निर्धन को धन की कामनापशु को वाणी की कामना,  लोगों को स्वर्ग की कामनादेव लोगों को मुक्ति की कामना.

  • सत्य की शक्ति ही इस दुनिया का धारण करती है.  सत्य की शक्ति से ही सूर्य प्रकाशमान है.  हवाएं चलती हैं सही में सब कुछ सत्य पर आश्रित है.

  • आदमियों में नाई सबसे धूर्त है.  कौवा पक्षियों में धूर्त है.  लोमड़ी प्राणियों में धूर्त है.  औरतों में लंपट और सबसे धूर्त है.

  • यह सब आप के पिता हैंजिसने आप को जन्म दिया,  जिसने आपका यगोपवित संस्कार कियाजिसने आप को पढ़ाया,  जिसने आप को भोजन दिया,  जिसने आपको भरपूर परिस्थितियों में बचाया.

  • इन सब को अपनी माता समझेंराजा की पत्नी,  गुरु की पत्नीमित्र की पत्नी,  पत्नी की मां,  आपकी मां.

  • धर्म की रक्षा पैसे से होती हैज्ञान की रक्षा जमकर आजमाने से होती हैराजा से रक्षा उसकी बात मानने से होती हैघर की रक्षा एक दक्ष ग्रहणी से होती है.

  • पक्षियों में कौवा नीच हैपशुओं में कुत्ता नीचे,  जो तपस्वी पाप करता है वह घिनौना हैलेकिन जो दूसरों की निंदा करता है वह सबसे बड़ा चांडाल है.

  •  राख से घिसने पर पीतल चमकता हैतांबा इमली से साफ होता है,  औरत प्रदर से शुद्ध होती हैनदी बहती रहे तो साफ़ रहती है.

  • राजा, ब्राम्हण और तपस्वी योगी जब दूसरे देश जाते हैंतो आदर पाते हैं,  लेकिन औरत यदि भटक जाती है तो बर्बाद हो जाती है.

  • धनवान व्यक्ति के कई मित्र होते हैं.  उनके कई संबंधी भी होते हैं,  धनवान को ही आदमी कहां जाता है और पैसे वालों को ही पंडित का नवाजा जाता है.



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